चांद का तापमान जानकर ISRO के वैज्ञानिक वैज्ञानिक भी हैरान
अगस्त 29, 2023
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चांद का तापमान जानकर ISRO के वैज्ञानिक भी हैरान, बोले- 70 डिग्री सेल्सियस की नहीं थी उम्मीद
चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव के चंद्रमा की सतह के पास 70 डिग्री सैल्सियस तापमान के होने की जानकारी दी है. (इसरी)
Chal 3 चंद्रय द्वारा रविव को चंद्रम दक्षिण ध्रुव सतह के तापम पर अपन पहल निष्क भेजा. इस
नई दिल्ली, चंद्रयान-3 द्वारा रविवार को दक्षिणी ध्रुव के चंद्रमा की सतह के तापमान पर अपना पहला निष्कर्ष भेजे जाने के बाद वैज्ञानिकों ने कहा कि सतह के पास 70 डिग्री सेल्सियस तापमान के होने की उम्मीद नहीं थी. चंद्रयान 3 जिस सतह पर उतरा और अपने प्रयोगों को अंजाम दे रहा है, वहां 20 डिग्री सेंटीग्रेड से 30 डिग्री के बीच तापमान का अनुमान लगाया गया था. हम सभी का मानना था कि सतह पर तापमान 20 डिग्री सेंटीग्रेड से 30 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास हो सकता है, लेकिन यह 70 डिग्री सेंटीग्रेड है.
इसरो के वैज्ञानिक बी एच दारुकेशा ने कहा, 'यह आश्चर्यजनक रूप से हमारी उम्मीद से अधिक है, पृथ्वी पर शायद ही कोई ऐसी भिन्नता है और इसलिए चंद्रयान 3 के पहले निष्कर्ष बहुत दिलचस्प हैं. उन्होंने कहा, 'जब हम पृथ्वी के अंदर दो से तीन सेंटीमीटर जाते हैं। तो हम मुश्किल से दो से तीन डिग्री सेंटीग्रेड भिन्नता देखते हैं, जबकि वहां (चंद्रमा में यह करीब 50 डिग्री सेंटीग्रेड भिन्नता है, यह कुछ दिलचस्प है.'
दक्षिणी ध्रुव के आसपास चंद्रमा की सतह पर तापमान में भिन्नता 70 डिग्री सेल्सियस से
शून्य से 10 डिग्री सेल्सियस नीचे तक है. यह पहली बार है जब इसरो के चंद्रयान 3 के
सौजन्य से दुनिया की वैज्ञानिक बिरादरी को जानकारी मिली..
चंद्रयान चांद की rayaane Soft Gandion भेजी अनोखी तस्वीर
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चंद्रयान 3 ने चंद्रमा की सतह पर तापमान भिन्नता में क्या पाया इसरो द्वारा जारी किए गए ग्राफ में चंद्रमा की सतह के तापमान की जांच विक्रम पेलोड द्वारा अलग-अलग गहराई पर की गई है. जैसा कि चार्ट से पता चलता है, जमीन पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है और यह 20 सेमी की ऊंचाई पर 60 डिग्री से अधिक बढ़ जाता है. 80 सेमी गहराई पर, जो जमीन के नीचे है, तापमान शून्य से 10 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर जाता है.
दिन के दौरान तापमान मापा गया है, क्योंकि चंद्रमा में अभी भी एक चंद्र दिवस चल रहा है. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 की 'सॉफ्ट लैंडिंग के लिए दक्षिणी ध्रुव को चुनने का कारण बताते हुए कहा था कि दक्षिणी ध्रुव सूर्य से कम रोशन होता है *fast india news*
