एक रिमोट से कर डाली 3 करोड़ की चोरी CID ने पकड़ा कंप्यूटर कांटा हैक करने का खेल, गैंग ने कई प्रोजेक्ट से चुराया सैकड़ों टन लोहा
जयपुर में CID ने ऐसे गिरोह को पकड़ा है जिसने एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से 3 करोड़ की चोरी को अंजाम दिया।
मणिपाल यूनिवर्सिटी ने एक बड़े प्रोजेक्ट में सरिया सप्लाई करने का जिसे ठेका दिया था। उसी सप्लायर की गैंग डिवाइस के जरिए कंप्यूटर कांटा हैक कर पालमेल कर रही थी। गोदाम से सरिया निकलने के बाद ठेकेदार हर टुक से 10 से 20 टन सरिया उतार लेता था फिर ट्रक को यूनिवर्सिटी में ले जाता और हैक किए गए कांटे पर वजन करा लिया जाता था। हैरानी की बात है कि इतना सरिया पोरी होने पर भी काटे पर चजन पूरा निकलता था। चोरी की इस अनोखी वारदात की भास्कर ने पड़ताल की ये छोटी सी डिवाइस बेहद कम दाम में बड़े ही आराम से बाजार में बिक रही है। जो करोड़ों रुपए की चोरी को अंजाम दे सकती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट.... सबसे पहले देखिए भास्कर पड़ताल 5000 से लेकर 25 हजार में बिक रही हैकिंग डिवाइस
कंप्यूटर कोर्ट में करते थे गैंग के
डिवाइस के बारे में पता लगने पर हमने सबसे पहले यूट्यूब और इंटरनेट पर सर्च किया। ऐसे बहुत सारी वीडियो मिले जिसमें साफ बताया जा रहा था कि कैसे कंप्यूटराइज्ड कोर्ट को हैक करके लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं। डिवाइस को बेचने के लिए लोगों ने वीडियो डाल रखे हैं। हमने एक इंटरनेट पर डिवाइस बेचने वाले से संपर्क किया। उसने बताया कि वह दिल्ली से बोल रहा है। उसके पारा 5000 से लेकर 25000 रुपए तक की डिवाइस उपलब्ध है। जोकि रिमोट से कंट्रोल होती है। हमने उससे होम डिलीवरी का मुछा तो बोला पहले पेमेंट कर दो अपना नाम, पूरा एड्रेस, मोबाइल नंबर और पिन कोड नंबर भेज दो। उसने 5 दिन में होम डिलीवरी हो जाएगी। भास्कर को भेजा डेमो वीडियो हमने उससे पूछा कि ये डिवाइस काम कैसे करती है तो उसने 5 मिनट बाद ही कई डेमो वीडियो और फोटो भेजे। इन वीडियो में समझाया गया है कि कंप्यूटराइज्ड कोटे में तीन तार लगी होती है जोकि कंप्यूटर से जुड़ी होती है।
चाहें तो इस डिवाइस को कांटे के अंदर फिट कर सकते हैं या फिर कंप्यूटर के ही पास लगा सकते हैं। डिवाइस में भी तीन रंग के तार होते है, जो बड़ी आसानी से कंप्यूटर कोटे के साथ अटैच हो जाते हैं। खास बात यह है कि डिवाइस लगी है या नहीं इसका किसी को पता नहीं चलता। मनमर्जी से बढ़ा या कम कर सकते हैं वजन डिवाइस के साथ एक रिमोट भी होता है एक बार डिवाइस फिट करने के बाद वजन घटाने बढ़ाने का काम रिमोट से कंट्रोल कर सकते हैं। इस रिमोट में मात्र ऑन ऑॉफ, प्लस माइनस के चार बटन होते हैं। जब माल से भरे ट्रक को कांटे पर लाया जाता है तो इसी रिमोट से वजन को बढ़ा या घटा सकते हैं। रिमोट की रेंज भी 10 से 15 मीटर के आसपास की रहती है। मतलब इतनी दूर खड़े होकर भी आराम से कांटे को कंट्रोल किया जा सकता है।
अब वो मामला जिसने CID को चौकाया
मणिपाल यूनिवर्सिटी में एक बिल्डिंग बनाने का प्राइवेट कंपनी ने ठेका ले रखा है उस कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर जयेंद्र राज सिंह ने बगरू थाने में दर्ज कराई थी। जिसमें उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग के लिए उन्होंने जय बजरग स्टील्स को सरिया का ऑर्डर दिया था। 15 सितंबर को ट्रक नंबर RJ47GA0608 सरिया लेकर रवाना हुआ तब उसके वजन की पर्ची 52:47 टन की थी। लेकिन ये ट्रक 16 सितंबर की रात 10.31 बजे पहुंचा, तब इसका वजन महज 47.740 टन ही निकला पानी करीब 5 टन से ज्यादा सरिया गायब था। शक होने पर मैनेजर ने ड्राइवर धनराज से पूछताछ की तो उसने बताया कि सप्लायर के गोदाम से सरिया भरने के बाद यह माल मुलाना मंडी में एक पार्क में जाता है। वहां पर पहले से क्रेन खड़ी रहती है क्रेन से 5 से 7 टन माल निकाल लिया जाता है तब ट्रक को आपकी साइट पर भेजा जाता है। ट्रक के साथ सप्लायर का मुशी शाहरुख भी साथ आता है जो काफी शातिर है। उसने कंप्यूटराइज्ड फांटे में एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस रखी है।
इसी कांटे पर तुलाई के बाद आपके यहां डिलीवरी होती
है।
यह धनराज ने बताया कि शाहरुख दूर से ही एक रिमोट
से वजन को कंट्रोल कर देता है। इसके बाद प्रोजेक्ट
मैनेजर ने माल डिलीवरी होने से पहले दूसरे धर्म कांटे पर वजन करवाया। 17 सितंबर को आए ट्रक नंबर RJS2GA1254 का वजन में 10 टन सरिया कम निकला। फिर 18 सितंबर को आए RJ14GN 7880 को दूसरे कांटे पर ले जाकर वजन कराया तो 4 टन सरिया कम निकला। पुलिस ने ऐसे कसा गिरोह पर शिकंजा सीआईडी ने इस अनोखी चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए एसआई दयाराम के नेतृत्व
में टीम गठित की टीम ने दो दिन तक गिरोह की हर एक्टिविटी पर नजर रखी। जांच में पता लगा कि सरिया की नामी कंपनियों के गोदाम से माल भरने के बाद ट्रकों को मुहाना इलाके में बने एक यार्ड में ले जाया जाता है। टीम जय बजरंग स्टील के मुहाना में बने गार्ड तक पहुंची। देखा कि क्रेन की सहायता से ट्रक से सरिया उतारा जा रहा था। सीआईडी टीम ने सरिया चुराते हुए वीडियो भी बनाए। यहां से कई टन माल उतारने के बाद वही ट्रक मणिपाल यूनिवर्सिटी की कंस्ट्रक्शन साइट के पास उस कांटे पर तौला जाता, जहां शाहरुख ने पहले से डिवाइस फिट कर रखी थी। जय बजरंग स्टील के मालिक सुभाष यादव है और पार्टनर प्रवेश यादव दोनों अलवर के बहरोड़ के रहने वाले है। सरिया ट्रकों से चुराने के बाद से ठेकेदार बिना बिल के सस्ते दामों में ही सरिया बेच देते थे। सीआईडी टीम ने मुहाना और बगरू पुलिस के साथ मिलकर या पर दबिश दी तो प्रवेश यादव, शाहरुख सहित चार को पकड़ लिया। वहीं सप्लायर सुभाष यादव फरार हो गया।
लिए 250 टन माल चुराया जिसकी कीमत 3 करोड़ के करीब करने पर सामने आया है कि रोजाना गोदाम से कंपनी से 250 टन माल सरिया मंगाती है जोकि 6. ट्रकों में भरकर जाता था। इन ट्रकों को सप्लायर हमेशा शाम के समय में ही माल लेने गोदाम भेजता था। वहां से पार्ड में माल उतारने के बाद उसे देर रात तक रवाना कर देता था। शाम के समय में मजदूरों की छुट्टी का समय भी रहता है। भीड़ भी अधिक रहती है। एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक अब तक ये गैंग एक ही प्रोजेक्ट से 250 टन सरिया चुरा चुकी है। इसकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ के आस-पास बताई जा रही
सप्लायरों के पास कई सरकारी प्रोजेक्ट, SMS
हॉस्पिटल की बिल्डिंग में भी यहीं से जा रहा माल
पुलिस जांच में सामने आया है कि सप्लायर सुभाष
यादव और प्रवेश यादव ने कई सरकारी प्रोजेक्ट भी से रही है जिनमें यह सरिया भेजते हैं माल लाने और ले जाने वाले ट्रक और उनके ऑपरेटर भी इनके खुद के है। एसएमएस अस्पताल की नई बिल्डिंग के लिए भी सरिया इन्हीं के यहां से कई बार सप्लाई हो चुका है। इसके अलावा भी कई ऐसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिनमें रोजाना ऐसे ही डिवाइस लगा कर चोरी की जा रही थी। केवल बड़े प्रोजेक्ट में ही डिवाइस का प्रयोग किया जाता है। हालांकि दूसरे किसी प्रोजेक्ट में सरिया चुराने का खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। इसके लिए पूछताछ
चल रही है
